عربی اول

تنقیش النحو
تنقیش النحو
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ١
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ١
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٢
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٢
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٣
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٣
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٤
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٤
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٥
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٥
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٦
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٦
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٧
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٧
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٨
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٨

इमाम अबू नस्र सिंधी (रह.) का हिकमत भरा जवाब

इमाम अबू नस्र सिंधी (रह.) का हिकमत भरा जवाब

इमाम अबू नस्र फ़तह बिन अब्दुल्लाह सिंधी (रहमतुल्लाही अलैहि) दूसरी सदी हिजरी के उन उलेमा (विद्वानों) में से हैं जो सिंधी मूल के थे, और सिंध में मुसलमानों के प्रवेश के बाद इस्लाम से सम्मानित हुए थे। मुसलमान होने के बाद वे तफ़सीर, हदीस, फ़िक़्ह और कलाम के प्रामाणिक विद्वान माने गए। अल्लामा समआनी (रह.) ने उनका यह वाक़िया सनद (प्रमाण) के साथ नक़ल किया है: अब्दुल्लाह बिन हुसैन कहते हैं कि एक दिन हम अबू नस्र सिंधी के साथ धूल और कीचड़ से भरी हुई ज़मीन पर चले जा रहे थे, उनके बहुत से अक़ीदतमंद (अनुयायी) भी साथ थे। हमने देखा कि एक अरब शहज़ादा मदहोशी (नशे) की हालत में ज़मीन पर ख़ाक (धूल) और कीचड़ में लथपथ पड़ा है। उसने हमारी तरफ नज़र उठाकर देखा तो अबू नस्र (रह.) ने मुँह क़रीब करके सूंघा, उसके मुँह से शराब की बदबू आ रही थी। शहज़ादे ने अबू नस्र (रह.) से कहा: "ओ ग़ुलाम! मैं जिस हालत में पड़ा हूँ तुम देख रहे हो, लेकिन तुम हो कि इत्मीनान से चले जा रहे हो, और इतने सारे लोग तुम्हारे पीछे-पीछे हैं?" अबू नस्र (रह.) ने बेबाकी (निडरता) से जवाब दिया: "शहज़ादे! जानते हो इसकी क्या वजह है? बात यह है कि मैंने तुम्हारे आबा-ओ-अजदाद (पूर्वजों यानी सहाबा और ताबेईन) की पैरवी शुरू कर दी है, और तुम मेरे आबा-ओ-अजदाद (काफ़िरों) के नक़्श-ए-क़दम पर चल पड़े हो।" (अल-अंसाब लिस्सामआनी, वरक़: 313 और मुअजम उल-बुल्दान, जिल्द: 3, पृष्ठ: 267; माख़ूज़ अज़ (साभार) फ़ुक़हा-ए-हिंद, संकलनकर्ता: मोहम्मद इसहाक़ भट्टी, जिल्द: 1, पृष्ठ: 80 और 81) ------------------------------------------------------- किताब: तराशे 📔 (पृष्ठ संख्या: 57, 58) लेखक: मुफ़्ती मोहम्मद तक़ी उस्मानी साहब नक़ल कर्ता: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

सबसे हालिया

Naats