عربی پنجم

فیض سبحانی شرح اردو حسامی 2
فیض سبحانی شرح اردو حسامی 2
الحسامی
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شرحِ سلم العلوم
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الہدایہ جلد 8
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الہدایہ جلد 7
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الہدایہ جلد 6
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الہدایہ جلد 5
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الہدایہ جلد 1
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الہدایہ جلد 2
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सहाबा इकराम (रज़ि.) के हुब्बे-नबी (नबी से मोहब्बत) की एक ख़ास दलील

सहाबा इकराम (रज़ि.) के हुब्बे-नबी (नबी से मोहब्बत) की एक ख़ास दलील

हम में से किसी भी इंसान की जवानी जब ढलने लगती है और वह अधेड़ उम्र की तरफ बढ़ने लगता है, तो अमूमन बाल सफ़ेद होने शुरू होते हैं। जब बाल सफ़ेद होना अभी शुरू ही हुए हों, तब अगर किसी इंसान से पूछा जाए कि आपके बदन में कितने बाल सफ़ेद हैं? तो बहुत मुश्किल है कि वह गिनती के साथ बता सके कि इतने बाल सफ़ेद हुए हैं। कोई इंसान ख़ुद के बारे में भी यह बात यक़ीनी तौर पर नहीं बता सकता। लेकिन क़ुर्बान जाओ हज़रात सहाबा इकराम (रज़ि.) के हुब्बे-नबी (नबी से मोहब्बत) पर कि उन्होंने रसूलुल्लाह ﷺ के जमाले-जहाँ आरा (जगत-प्रसिद्ध सौंदर्य) और हुस्ने-बेमिसाल को इतनी बारीकी से देखा कि हज़रत अनस (रज़ियाल्लाहु अन्हु) दावे के साथ यह बात बयान फ़रमाते हैं कि सरकारे-दो-जहाँ ﷺ के सरे-मुबारक और दाढ़ी-मुबारक को मिलाकर बीस से ज़्यादा सफ़ेद बाल नहीं थे। عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ سَمِعَهُ يَقُولُ : كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْسَ بِالطَّوِيلِ الْبَائِنِ وَلَا بِالْقَصِيرِ ، وَلَا بِالْأَبْيَضِ الْأَمْهَقِ وَلَيْسَ بِالْآدَمِ وَلَيْسَ بِالْجَعْدِ الْقَطَطِ وَلَا بِالسَّبْطِ بَعَثَهُ اللَّهُ عَلَى رَأْسِ أَرْبَعِينَ سَنَةً ، فَأَقَامَ بِمَكَّةَ عَشْرَ سِنِينَ وَبِالْمَدِينَةِ عَشْرَ سِنِينَ ، فَتَوَفَّاهُ اللَّهُ وَلَيْسَ فِي رَأْسِهِ وَلِحْيَتِهِ عِشْرُونَ شَعْرَةً بَيْضَاءَ(بُخاری شریف: ۳۵۴۸) रसूलुल्लाह ﷺ न बहुत लंबे थे और न छोटे क़द के, न बिल्कुल सफ़ेद थे और न गंदमी रंग के, न आपके बाल बहुत ज़्यादा घुँघराले थे और न बिल्कुल सीधे लटके हुए। अल्लाह तआला ने आपको चालीस साल की उम्र में नबुव्वत दी और आपने मक्का में दस साल तक क़ियाम (निवास) किया और मदीना में दस साल तक क़ियाम किया। जब अल्लाह तआला ने आपको वफ़ात दी तो आपके सर और दाढ़ी के बीस बाल भी सफ़ेद नहीं थे। ज़रा तसव्वुर करो (सोचो)! हज़रात सहाबा इकराम (रज़ि.) को रसूलुल्लाह ﷺ से किस क़दर मोहब्बत थी कि उन्होंने आपके ﷺ के हुलिया-ए-मुबारका (शारीरिक रूप) का इतनी बारीकी से मुशाहदा (अवलोकन) किया। उनके हुब्बे-नबी को बयान करने के लिए तो पूरा कुतुबख़ाना (पुस्तकालय) भी नाकाफ़ी है। ___________📝📝📝___________ चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो

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