عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

ایضاح الطحاوی شرح اردو طحاوی شریف جلد ١
ایضاح الطحاوی شرح اردو طحاوی شریف جلد ١
ایضاح الطحاوی شرح اردو طحاوی شریف جلد ٢
ایضاح الطحاوی شرح اردو طحاوی شریف جلد ٢
ایضاح الطحاوی شرح اردو طحاوی شریف جلد ٣
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کتاب التعریفات
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المرقاة
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تحفة المنظور شرح اردو مرقات
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المرقات
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جملوں کی شناخت کیسے کریں ؟
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50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक

50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक

एक बिजली के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर मैं करीब चला गया और उस पर लिखी तहरीर (लिखावट) पढ़ने लगा। लिखा था.........! "बराय-ए-करम (कृपया) ज़रूर पढ़ें। इस रास्ते पर कल मेरा 50 रुपये का नोट खो गया है, मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता। जिसे भी मिले, बराय-ए-करम पहुँचा दे, नवाज़िश (कृपा) होगी................ !!!" पता (एड्रेस):- ۔۔۔۔******۔۔۔۔*****۔۔۔ यह पढ़ने के बाद मुझे बहुत हैरत हुई कि पचास का नोट किसी के लिए इतना ज़रूरी है, तो उस पते पर जाने का इरादा किया और उस गली में उस मकान के दरवाज़े पर आवाज़ लगाई। एक ज़ईफ़ा (वृद्ध महिला) लाठी टेकती हुई बाहर आईं। पूछने पर मालूम हुआ कि बड़ी बी अकेली रहती हैं और कम दिखाई देता है। मैंने कहा, "माँ जी! आपका पचास का नोट मुझे मिला है..........! उसे देने आया हूँ।" यह सुनकर बुढ़िया रोने लगीं! "बेटा......... ! अभी तक क़रीब-क़रीब 50 लोग मुझे पचास का नोट दे गए हैं! मैं अनपढ़ हूँ, ठीक से दिखाई भी नहीं देता, पता नहीं कौन मेरी इस हालत को देखकर मेरी मदद करने के लिए लिखकर चला गया.......!!" ! बहुत इसरार (आग्रह) करने पर माई ने पैसे तो रख लिए लेकिन एक दरख़्वास्त (अनुरोध) की कि, "बेटा! वह मैंने नहीं लिखा, किसी ने मेरी मदद की ख़ातिर लिख दिया है। जाते हुए उसे फाड़कर फेंक देना बेटा!!" मैंने हाँ कहकर टाल तो दिया;;; लेकिन मेरे ज़मीर (अंतरात्मा) ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि उन सभी लोगों से बुढ़िया ने वह कागज़ फाड़ने के लिए कहा होगा, मगर किसी ने नहीं फाड़ा। ज़िंदगी में हम कितने सही हैं और कितने ग़लत, यह सिर्फ़ दो ही जानते हैं: एक "अल्लाह तआला" दूसरा हमारा "ज़मीर"। मेरा दिल उस शख़्स के बारे में सोचने पर मजबूर हो गया कि वह शख़्स कितना मुख़्लिस (सच्चा/नेक) होगा जिसने बुढ़िया की मदद का यह तरीक़ा तलाश किया। ज़रूरतंदों की इमदाद (मदद) के कई तरीक़े हैं, मैंने उस शख़्स को दिल से दुआएँ दीं। किसी की मदद करने के कितने तरीक़े हैं, सिर्फ़ मदद करने की नीयत होनी चाहिए, रास्ता और रहनुमाई (मार्गदर्शन) अल्लाह सुब्हानहू की तरफ़ से हो जाती है!!! शऊर (समझ) और एहसास बेदार (जागृत) करने के लिए,,, शुक्रिया।

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