عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

درس مسلم جلد ٢
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اشرف النبیین شرح اردو قصص النبیین جلد ١
اشرف النبیین شرح اردو قصص النبیین جلد ١
اشرف النبیین شرح اردو قصص النبیین جلد ٢
اشرف النبیین شرح اردو قصص النبیین جلد ٢
اشرف النبیین شرح اردو قصص النبیین جلد ٣
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جدید تیسیر المبتدی
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تسہیل الحقائق شرح اردو کنز الدقائق جلد ١
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تسہیل الحقائق شرح اردو کنز الدقائق جلد ٢
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شرح نفحة الادب
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एक हैरतअंगेज़ दरयाफ़्त: चींटियों की वैज्ञानिक समझ

एक हैरतअंगेज़ दरयाफ़्त: चींटियों की वैज्ञानिक समझ

परसों एक किताब पढ़ रहा था۔۔ इस दौरान एक छोटी सी मक्खी उड़ कर मेरी किताब पर आ बैठी۔۔۔ पहले तो मैंने उसको भगा देने की कोशिश की۔۔۔۔ लेकिन वह उड़-उड़ कर किताब पर वापस आ बैठती। यह देख कर मैं सोच में पड़ गया कि ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता) ने कैसी-कैसी मख़्लूक़ (जीव) पैदा फ़रमाई है। उनका साइज़ और हरकतें देख कर बंदा हैरान रह जाता है, कि इस क़दर छोटे साइज़ के 'हशरात' (कीड़े-मकोड़ों) में भी दिमाग़ होगा। आज दुनिया माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स फील्ड में बहुत ही आगे है लेकिन फिर भी ऐसी चिप बनाने से आजिज़ (असमर्थ) है۔۔ और अगर बिल-फ़र्ज़ (मान लें) ऐसी कोई चिप बनाने में कामयाब भी हो गई۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔ तो वह कभी ख़ुदकार (स्वचालित) फ़ैसला नहीं करेगी क्योंकि चिप ख़ुदकार फ़ैसला नहीं कर सकती, उनको फिर प्रोग्राम करना होगा और अगर हमने प्रोग्राम भी किया, फिर भी वह ख़ुद से कभी मक्खी उड़ाने के क़ाबिल नहीं होगी। क्योंकि उनके लिए फिर इस चिप के आगे-पीछे, दाएं-बाएं मज़ीद (और) 'इलेक्ट्रॉनिक्स' चीजें लगानी पड़ेंगी, नतीजा इसका साइज़ फिर बढ़ाना होगा। लेकिन माइक्रो लेवल पर अगर आप 'जानदारों' को देखें, तो आप हैरान हो जाएंगे कि इनको कैसे पता चलता है कि यह काम करना है और यह नहीं। वैज्ञानिकों ने दरयाफ़्त (खोज) किया है कि चींटियाँ सर्दियों के लिए दरकार (आवश्यक) अनाज और 'बीजों' को जमा करने के बाद अपने घोंसलों में ज़ख़ीरा (भंडारण) करने से पहले इन बीजों को आधे हिस्से में तोड़ देती हैं۔۔۔۔۔۔ उन्हें आधे हिस्से में तोड़ने से वे बारिश के दौरान दोबारा ज़रख़ेज़ (अंकुरित) होने से महफ़ूज़ (सुरक्षित) रहती हैं क्योंकि इस तरह पानी उनको ख़ुराक मुहैया (प्रदान) नहीं कर पाता। इस वजह से तमाम चींटियाँ ऐसा ही करती हैं, ये बातें इनको कौन समझाता है? कि आपने ऐसा करना है۔۔۔۔। ये बात तो आपने अक्सर दोस्तों से सुनी होगी लेकिन वैज्ञानिक उस वक़्त दंग रह गए जब उन्होंने दरयाफ़्त किया कि चींटी के घरों में रखे हुए धनिया के बीज दो की बजाय चार टुकड़ों में काटे गए थे। वैज्ञानिक जब किसी चीज़ के पीछे पड़ जाते हैं, तो उससे नतीजा ज़रूर निकालते हैं, उनमें एक जुस्तजू (जिज्ञासा) होती है और वह जुस्तजू उनको नतीजा निकालने पर मजबूर कर देती है। लैबोरेट्री रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने दरयाफ़्त किया कि एक धनिया का बीज दो हिस्सों में तक़्सीम (विभाजित) होने के बाद भी उगता है।। लेकिन चार हिस्सों में तक़्सीम होने के बाद कभी उग नहीं सकता۔۔۔ गोया इन चींटियों में भी हमारी तरह वैज्ञानिक मौजूद हैं क्योंकि अगर उनमें वैज्ञानिक न होते, तो फिर यह मख़्लूक़ यह सब कैसे जानती कि हमने यह काम करना है, और यह नहीं۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔? लिहाज़ा मैं आप सब 'दोस्तों' से बज़ात-ए-ख़ुद चींटियों के आगे 'धनिया' का 'बीज' डाल कर उनके इस अनोखे अंदाज़-ए-ज़ख़ीरा अंदोज़ी का मुशाहिदा (अवलोकन) करने की उम्मीद रखता हूँ। दस-पंद्रह दिन में आपको रिज़ल्ट मिल जाएगा"۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔!!!!! ______________ 📝📝📝_______________ मनक़ूल (उद्धृत)। नाक़िल (कॉपीकर्ता): इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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