عربی اول

مشکوة العربیہ شرح مفتاح العربیہ جلد ١
مشکوة العربیہ شرح مفتاح العربیہ جلد ١
مفتاح البلاغہ شرح اردو دروس البلاغہ
مفتاح البلاغہ شرح اردو دروس البلاغہ
ضیاء الصبیح تقریر مشکوۃ المصابیح
ضیاء الصبیح تقریر مشکوۃ المصابیح
چہل سبق
چہل سبق
حکایت لطیف
حکایت لطیف
تلخیص القاضی
تلخیص القاضی
سنن النسائی
سنن النسائی
التكمیل الضروری شرحِ اردو مختصر القدوری
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الصبح النوری شرحِ اردو مختصر القدوری
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पिता का शिक्षाप्रद उत्तर

पिता का शिक्षाप्रद उत्तर

अबुल कलाम कहते हैं: एक रात खाने के समय मेरी माँ ने सालन (सब्ज़ी) और जली हुई रोटी मेरे पिता के आगे रख दी। मैं पिता की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करता रहा कि शायद वह ग़ुस्से का इज़हार करेंगे, लेकिन उन्होंने बेहद सुकून से खाना खाया और साथ ही मुझसे पूछा कि आज स्कूल में मेरा दिन कैसा गुज़रा? मुझे याद नहीं कि मैंने क्या जवाब दिया... लेकिन इसी दौरान मेरी माँ ने रोटी जल जाने पर माफ़ी मांगी। मेरे पिता ने कहा: "कोई बात नहीं, बल्कि मुझे तो यह रोटी खाकर मज़ा आया।" उस रात जब मैं अपने पिता को शुभ रात्रि (गुड नाइट) कहने उनके कमरे में गया, तो उनसे इस बारे में पूछ ही लिया कि क्या वाकई आपको जली हुई रोटी खाकर मज़ा आया? उन्होंने जवाब दिया: "बेटा, एक जली हुई रोटी कोई नुक़सान नहीं पहुँचाती, लेकिन कड़वी प्रतिक्रिया और बदज़ुबानी इंसान के जज़बात को ठेस पहुँचाती हैं। मेरे बच्चे! यह दुनिया अनगिनत नापसंद चीज़ों और लोगों से भरी पड़ी है, मैं भी कोई बेहतरीन या मुकम्मल (पूर्ण) इंसान नहीं हूँ और मैं यह समझता हूँ कि हमारे आस-पास के लोगों से भी ग़लती हो सकती है। एक-दूसरे की ग़लतियों को दरगुज़र (माफ़) करना, रिश्तों को बख़ूबी निभाना और दरियादिली दिखाना ही संबंधों में सुधार का कारण बनता है। हमारी ज़िंदगी इतनी छोटी है कि इसमें माफ़ी और पछतावे की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।" ज़िंदगी को शुक्र (कृतज्ञता) और सब्र (धैर्य) के साथ खुशहाल बनाएं, बेशक अल्लाह शुक्र करने वालों को पसंद करता है। ___________📝📝📝___________ मनकूल (साभार) चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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