عربی چھارم

اشرف الانوار شرح اردو نور الانوار جلد 1۔2
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المفتاح السامی
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شرحِ مفید الطالبین
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آسان نحو جلد 1
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آسان نحو جلد 2
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ابو داؤد شریف جلد 1
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ابو داؤد شریف جلد 2
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مرآۃ الانوار شرحِ اردو مشکوٰۃ الآثار جلد 1
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مرآۃ الانوار شرحِ اردو مشکوٰۃ الآثار جلد 2
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आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी

आत्मसम्मान और संवेदनशीलता की अनजानी डोर: एक जूता पॉलिश करने वाले और दो दोस्तों की कहानी

दफ़्तर के करीब फ़ुटपाथ पर बैठे उस बूढ़े से आते-जाते जूते पॉलिश करवाना उसका नियम था। मगर एक अजीब बात जो मैं पिछले कई दिनों से नोट कर रहा था, वह यह थी कि वह हर बार जूता पॉलिश करवाने के बाद उस बुजुर्ग से उलझता कि "पॉलिश ठीक नहीं की, इसलिए दोबारा करो।" और हैरानी की बात यह कि दोबारा पॉलिश करवाने का मुआवज़ा भी दो बार अदा करता, जबकि वह मेहनती बुजुर्ग पहली बार भी जूता बहुत अच्छे से चमकाता था। मेरे दोस्त के ऐतराज (आपत्ति) पर वह बुजुर्ग हल्की सी मुस्कान के साथ जूते फिर से पॉलिश करके अपनेपन से उसके पैरों में पहना देता। मैंने आज अपने दोस्त से उसके इस काम की वजह पूछी तो वह बोला: "जो व्यक्ति इस उम्र में मेहनत से कमा रहा हो, वह बहुत ख़ुद्दार (आत्मसम्मान से भरपूर) होता है। मैं उसकी मेहनत का डबल मुआवज़ा देने के लिए झूठ-मूठ का नुक्स (कमी) निकालता हूँ ताकि उसकी कुछ मदद हो सके।" मैं अपने दोस्त की सोच से प्रभावित हुए बिना न रह सका... आज दफ़्तर से वापसी पर मैं अकेला था। फ़ुटपाथ के करीब से गुज़रा तो देखा कि उस बुजुर्ग की बूढ़ी निगाहें मेरे साथ मेरे दोस्त को तलाश कर रही थीं। मैं पलटकर उनके पास गया और कहा: "आज आप मेरे जूते पॉलिश कर दें।" पॉलिश किए हुए जूते पैरों में डालते समय मैंने जेब से दो रुपये का सिक्का बूढ़े की तरफ बढ़ाया, तो वह सिक्का देखकर बोले: "बेटा, दो नहीं, पांच रुपये मुआवज़ा लेता हूँ पॉलिश का!" मैंने हैरानी से पूछा, "मगर मेरे दोस्त से तो आप रोज़ एक बार पॉलिश के दो रुपये लेते हैं, जबकि वह हमेशा पहली बार आपकी मेहनत पर ऐतराज भी करता है!" बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और जवाब दिया: "मैं जानता हूँ तुम्हारा दोस्त पहली बार ऐतराज इसलिए करता है ताकि वह दूसरी बार जूता पॉलिश करवाकर मुझे दोहरी मज़दूरी देकर मेरी कुछ मदद कर सके। इसीलिए मैं उससे पहली बार में आधी मज़दूरी ही वसूल करता हूँ!" बूढ़े का जवाब सुनकर मैंने पांच रुपये उनकी हथेली पर रखते हुए एक हैरानी भरी मुस्कान के साथ उनकी आँखों में झाँका, जिनमें ख़ुद्दारी की चमक के साथ-साथ अहसास (संवेदनशीलता) का रंग भी साफ़ दिखाई दे रहा था। बेशक, अहसास एक ऐसा अनजाना रिश्ता है जो अहसास की डोर से ही जुड़ा होता है। ___________📝📝📝___________ मनकूल (साभार) चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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