عربی چھارم

قوت الاخیار جلد ۳,۴
قوت الاخیار جلد ۳,۴
علم الصیغہ جدید
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علم الصیغہ اردو
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شرح مأۃ عامل
شرح مأۃ عامل
مفتاح العوامل شرح شرح مأۃ عامل
مفتاح العوامل شرح شرح مأۃ عامل
شرح مأۃ عامل مع حاشیہ
شرح مأۃ عامل مع حاشیہ
میزان الصرف اردو
میزان الصرف اردو
معلم الانشاء 1
معلم الانشاء 1
القراءۃ الواضحۃ ۱
القراءۃ الواضحۃ ۱

रोले अब दिल खोल कर :

रोले अब दिल खोल कर :

आह! कोई नहीं, सब गुमराह हो गए; सब निकम्मे निकले, सब गाफ़िल (लापरवाह) हो गए, सब पर मौत की नींद छा गई; सब ने एक ही तरह की हलाकत (विनाश) का घूंट पी लिया, सब एक ही तरह की तबाही पर टूट पड़े; सब ने ख़ुदा को छोड़ दिया, सब ने उसकी मोहब्बत से मुंह मोड़ लिया, सब ने उसके पवित्र रिश्ते को बट्टा लगा दिया (कलंकित कर दिया); सब ग़ैरों के हो गए, सब ने ग़ैरों की चौखटों की धूल चाटी और सब ने एक साथ मिलकर गंदगियों और नापाकियों से प्यार किया। आह! सब ने अहद (वचन) ले लिया कि हम एक ही समय में गुमराह हो जाएंगे और सब ने क़सम खा ली है कि हम एक ही वक़्त में ख़ुदा की पुकार से भागेंगे। आह! सब उससे भाग गए, सब ने उससे झुंड के झुंड (टोलियां) बनकर बेवफ़ाई की; कोई नहीं जो उसके लिए रोए, कोई नहीं जो उसके इश्क़ में आह-ओ-ज़ारी (विलाप) करे; उसकी मोहब्बत की बस्तियां उजड़ गईं, उसके इश्क़ और प्यार के घराने मिट गए, उसके गल्ले (भेड़-बकरियों के झुंड) का कोई रखवाला न रहा, और उसके खेतों की हिफ़ाज़त के लिए कोई आंख न जागी! सब शैतान के पीछे दौड़े, सब ने इबलीस के साथ आशिक़ी की और सब ने बदचलन औरतों की तरह अपनी आशनाई (यारी) के लिए उसे पुकारा! फिर इस पर क़यामत यह है कि किसी को नदामत (पछतावा/शर्मिंदगी) नहीं, किसी का सिर शर्म से नहीं झुकता, किसी के गले से तौबा और इनाबत (ईश्वर की ओर लौटने) की आवाज़ नहीं निकलती, किसी की पेशानी (माथे) में सज्दे के लिए बेक़रारी नहीं; कोई नहीं जो रूठे हुए (नाराज़ ख़ुदा) को मनाने के लिए दौड़ जाए और कोई नहीं जो अपनी बदहाली और हलाकत पर फूट-फूट कर रोए और मातम करे! आह! मैं क्या करूं और कहां जाऊं और किस तरह तुम्हारे दिलों के अंदर उतर जाऊं? और यह किस तरह हो कि तुम्हारी रूहें (आत्माएं) पलट आएं और तुम्हारी ग़फ़लत (लापरवाही) मर जाए? यह क्या हो गया है कि तुम पागलों से भी बदतर हो गए हो और शराब के मतवाले तुमसे ज़्यादा अक्लमंद हैं। तुम क्यों अपने आप को हलाक (बर्बाद) कर रहे हो और क्यों तुम्हारी अक़्लों पर ऐसा ताऊन (प्लेग/महामारी) छा गया है कि सब कुछ कहते हो, समझते हो, पर न तो रास्तबाज़ी (सच्चाई) की राह तुम्हारे आगे खुलती है और न तुम गुमराहियों के नक़्श-ए-क़दम (पदचिह्नों) को छोड़ते हो!! - मौलाना अबुल कलाम आज़ाद (रहमतुल्लाह अलैह)

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