عربی دوم

شرح ہدایت النحو
شرح ہدایت النحو
ارشاد النحو شرح اردو ہدایت النحو
ارشاد النحو شرح اردو ہدایت النحو
السقایہ علی شرح الوقایہ
السقایہ علی شرح الوقایہ
تلخیص الانوار لحل تقسیمات نور الانوار
تلخیص الانوار لحل تقسیمات نور الانوار
سراج الوقایہ شرح اردو شرح الوقایہ
سراج الوقایہ شرح اردو شرح الوقایہ
شرح الوقایہ
شرح الوقایہ
احسن الوقایہ شرح اردو شرح وقایہ
احسن الوقایہ شرح اردو شرح وقایہ
توضیحات_شرح_علم_الصیغہ
توضیحات_شرح_علم_الصیغہ
علم_الصیغہ
علم_الصیغہ

खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!

खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!

इमाम जलालुद्दीन रूमी (रह.) ने लिखा है कि एक आदमी सफर पर निकला। वह एक जंगल में चलता रहा और बहुत दूर चलने के बाद उसे भारी थकान महसूस हुई, जिसके कारण उस पर नींद हावी हो गई। उसने सोचा कि कहीं आराम कर ले; लेकिन सिर्फ इसलिए हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वह जंगल का रास्ता था। उसने सोचा, "जंगल के रास्ते में भला कैसे आराम करूँ?" वह सोचता रहा कि काश कोई ऐसी चीज़ मिल जाए जिससे थोड़ा सहारा मिल सके और वह आराम कर सके। काफी आगे जाने के बाद उसने देखा कि एक जानवर सोया हुआ है। उसने (खुश होकर) खुद से कहा, "बहुत अच्छा! यह कोई जानवर सो रहा है, मैं भी इसके बराबर में सो जाता हूँ।" अत्यधिक थकान और नींद के गल्बे (असर) के कारण वह उस जानवर के पास लेट गया और लेटते ही उसकी आँख लग गई। कुछ देर बाद उसी रास्ते से दो आदमी गुज़र रहे थे। जब वे वहाँ पहुँचे, तो उन्होंने एक अजीब और भयानक नज़ारा देखा कि एक इंसान सोया हुआ है और उसके बराबर में जो जानवर सो रहा है, वह वास्तव में एक शेर है! वे लोग बहुत परेशान हो गए कि कहीं यह शेर जागकर इस बेचारे को खा न जाए। उन्होंने आहिस्ता से सोने वाले को आवाज़ दी और जगाया। जब वह जागा, तो उन लोगों ने उससे कहा, "तुम कहाँ सोए हो? वह तुम्हारे बराबर में शेर है, शेर!" बस जनाब, इतना सुनते ही वह घबरा गया, बेहद परेशान हुआ और डर के मारे उसके प्राण पखेरू उड़ गए (उसकी जान निकल गई) और वह मर गया। इस घटना से मालूम होता है कि डर (खौफ) भी मारिफत और पहचान के नतीजे में ही पैदा होता है। अगर किसी चीज़ की पहचान और जानकारी न हो, तो डर नहीं आ सकता; और जब पहचान होगी, तो डर अपने आप आ जाएगा। देखिए! जब तक उसे शेर की पहचान नहीं थी, तब तक उस पर शेर का कोई डर भी पैदा नहीं हुआ। जैसे ही उसे शेर की मारिफत (पहचान) हासिल हुई, वैसे ही उसका खौफ भी पैदा हुआ और वह मर गया। ठीक इसी तरह, जब इंसान को अल्लाह की सच्ची पहचान हो जाती है कि अल्लाह कितना बड़ा, ज़बरदस्त और कितनी बड़ी ताकत वाला है और वह क्या से क्या कर सकता है; तो जब इंसान को अल्लाह की यह पहचान हासिल होगी, तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि उसके दिल के अंदर कोई हलचल न मचे और उसके दिल में अल्लाह का खौफ (डर) पैदा न हो। (किताब: वाक़यात पढ़िये और इब्रत लीजिये, पृष्ठ संख्या: 78-79 | लेखक: हज़रत मौलाना मुफ्ती शुऐबउल्लाह ख़ान साहब मिफ़्ताही — चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)

सबसे हालिया

Naats