عربی دوم

علم التصریف
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نوادر النحو فی حل ھدایۃ النحو
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تمرین المنطق
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تفہیم قطبی (اساتذہ و طلبہ کے لیے یکساں مفید)
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تسہیل المنطق
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کتاب الصرف جلد ۲
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کتاب الصرف جلد ۳
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کتاب النحو جلد ۲
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کتاب النحو جلد ۳
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दुम कटा लोमड़ और बिगड़ा हुआ समाज

दुम कटा लोमड़ और बिगड़ा हुआ समाज

एक लोमड़ (सियार) की दुम (पूंछ) पर पत्थर आ गिरा, और दुम कट गई। एक दूसरे लोमड़ ने जब उसे देखा तो पूछा, "यह तुमने अपनी दुम क्यों काटी?" दुम कटा लोमड़ बोला, "इससे बड़ी खुशी और फरहत (आनंद) महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे हवाओं में उड़ रहा हूँ। वाह!! क्या मनोरंजन है!" बस घेर-घार कर (बहला-फुसलाकर) उसने उस दूसरे लोमड़ को दुम काटने पर राजी कर ही लिया। उसने जब यह दुम कटाई की मुहिम सर कर ली (काम पूरा कर लिया), तो सुकून के बजाय गंभीर प्रकार का दर्द महसूस होने लगा!! पूछा, "मियां!! मुझसे झूठ क्यों बोला?" पहला कहने लगा, "जो हुआ सो हुआ! अब यह दर्द की दास्तान दूसरे लोमड़ों को सुनाई तो उन्होंने दुम नहीं कटवानी, और हम दो दुम कटों का मज़ाक बनता रहेगा!" बात समझ में आ गई तो ये दोनों दुम कटे पूरी बिरादरी को यह खुशनुमा अनुभव करने का कहते रहे। नतीजा यह निकला कि लोमड़ों की बहुसंख्या (अक्सरियत) दुम कटी हो गई। अब हालत यह हो गई कि जहाँ कोई दुम वाला लोमड़ दिखाई देता, उसका मज़ाक उड़ाया जाता! जब भी फ़साद (बुराई/बुरा आचरण) आम होकर फैल जाता है, तो जनता नेकोकारों (सज्जनों) को उनकी नेकी पर ताने देने लग जाती है और बेवकूफ लोग उनका मज़ाक उड़ाते हैं। हज़रत कअब से रिवायत है कि फ़रमाया, "लोगों पर ऐसा ज़माना आएगा कि मोमिन (आस्थावान) को उसके ईमान पर वैसे ही आर (शर्म/ताना) दिलाई जाएगी जैसे कि आज-कल बदकार (दुराचारी) को उसकी बदकारी पर आर दिलाई जाती है। यहाँ तक कि आदमी को तंज़िया (व्यंग्यपूर्वक) कहा जाएगा कि 'वाह भाई! तुम तो बड़े ईमानदार फ़क़ीह (ज्ञानी) बंदे हो!!'" बिगड़ा हुआ मुआशरा (समाज) जब नेकोकारों में कोई काबुल-ए-एतराज़ (आपत्तिजनक) बात नहीं तलाश कर पाता, तो उनकी बेहतरीन खूबी पर ही उनको आर दिलाने लग जाता है! लूत अलैहिस्सलाम की कौम ने क्या नहीं कहा था, "निकाल दो लूत के घर वालों को अपनी बस्ती से!! ये तो बहुत नेक बने फिरते हैं।" यह हमारे समाज की हकीकत है जिसमें हम जीते हैं। मनकूल (नकल किया गया)।

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