عربی دوم

دروس اللغة العربية لغير الناطقين بها الجزء الثانی
دروس اللغة العربية لغير الناطقين بها الجزء الثانی
النحو الواضح جلد ٣
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النحو الواضح جلد ٢
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ہدایة النحو
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القراءة الراشدة جلد سوم مترجم مع حل لغات
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درایة النحو شرح ہدایة النحو
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گلستان مترجم
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العلامات النحویة
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قواعد تذکیر و تانیث
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निष्कपटता की मिसाल

निष्कपटता की मिसाल

जब हज़रत साद बिन अबी वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने मदायन को फ़तह (विजय) किया, तो उन्होंने ऐलान करवाया कि जिस मुजाहिद (योद्धा) के पास जो भी माल-ए-ग़नीमत (युद्ध की सामग्री) है, वह सब लाकर एक जगह जमा करवाए ताकि हम उसे तक़्सीम (वितरित) कर सकें। लोग माल-ए-ग़नीमत जमा करवाने लग गए। तीन दिन गुज़र गए और ऐसा महसूस हुआ कि अब किसी के पास कुछ नहीं है। साद बिन अबी वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) बैठे हुए थे कि तभी एक नौजवान आया, जिसके कपड़े बहुत मामूली लग रहे थे। माली (आर्थिक) ऐतबार से वह इतना अमीर आदमी नज़र नहीं आता था; उसने मामूली और फटे हुए कपड़े पहने हुए थे। उसने एक कपड़े में कुछ लपेटा हुआ था, वह उसे लेकर आया और कहने लगा, "अमीर-ए-क़ाफ़िला (कारवां के कमांडर)! यह मैं आपको देने के लिए आया हूँ।" जब उन्होंने उसे खोला तो उसके अंदर दुश्मन बादशाह का ताज था—मानो उस मुजाहिद ने उस बादशाह को कत्ल किया हो और उसका ताज उसके हाथ लग गया हो, मगर लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं था। अगर यह मुजाहिद चाहता तो इसे अपने पास रख लेता और सारी ज़िंदगी इसके हीरे-मोती काट-काट कर बेचता और अपनी ज़िंदगी ठाठ-बाठ से गुज़ारता, क्योंकि बादशाहों के ताजों में तो बड़े-बड़े डायमंड (हीरे) होते थे। जब उस सादे से सिपाही ने वह ताज दिया, तो साद बिन अबी वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) बेहद हैरान हुए कि किसी को पता भी नहीं था और इतनी क़ीमती चीज़ उसने लाकर ख़ुद ही दे दी। हज़रत साद बिन अबी वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उससे पूछा, "ए मुजाहिद! तेरा नाम क्या है?" जब उससे पूछा गया कि तेरा नाम क्या है, तो उस नौजवान ने वापस जाने के लिए अपना रुख़ फेरा और दो क़दम वापसी की तरफ़ बढ़ाकर कहने लगा: "जिस अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के लिए यह ताज लाकर आपको वापस दिया, वह मेरा नाम भी जानता है और मेरे बाप का नाम भी जानता है।" यह होता है अल्लाह के लिए कुछ करना।

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