عربی سوم

البلاغۃ الواضحۃ و دلیلھا(علم البیان)
البلاغۃ الواضحۃ و دلیلھا(علم البیان)
البلاغۃ الواضحۃ و دلیلھا (علم البدیع)
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البلاغۃ الواضحۃ
البلاغۃ الواضحۃ
الدروس الواضحہ شرح الکافیہ
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منار الھدی علی قطر الندی و بل الصدی المجلد الاول
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منار الھدی علی قطر الندی و بل الصدی المجلد الثانی
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منار الھدی علی قطر الندی و بل الصدی المجلد الثالث
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منار الھدی علی قطر الندی و بل الصدی المجلد الرابع
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اجود الحواشي اردو شرح اصول الشاشي
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हलाल कमाई की अहमियत और मौलाना क़ासिम नानौतवी की आजिज़ी (विनम्रता)

हलाल कमाई की अहमियत और मौलाना क़ासिम नानौतवी की आजिज़ी (विनम्रता)

हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम साहब नानौतवी (रहमतुल्लाही अलैहि) का मुज़फ़्फ़रनगर में एक थानेदार मुअतक़िद (भक्त/प्रशंसक) था। एक दिन उसने हज़रत मौलाना नानौतवी की दावत की। मौलाना ने देखा था कि थानेदार की कमाई मुश्तबा (संदिग्ध) और मशकूक है, इस वजह से उसकी दावत को नामंज़ूर फ़रमा दिया। थानेदार ने दावत क़बूल न करने की वजह मालूम की तो हज़रत ने फ़रमाया, "मैं माज़ूर (असमर्थ) हूँ।" उसने कहा कि "अगर आप बीमार हों तो इलाज करा दूँ।" हज़रत ने फ़रमाया, "नहीं, कोई और उज़्र (वजह) है।" उसने कहा, "अगर जाने में तकलीफ़ हो तो सवारी का इंतज़ाम कर दूँ।" हज़रत ने फ़रमाया, "यह मजबूरी नहीं बल्कि दूसरा उज़्र है।" उसने फिर दरख़्वास्त की कि "खाना आपके यहाँ भेज दूँ?" आपने इंकार फ़रमाया। उसने अर्ज़ किया, "मैं ख़ुद हाज़िर होकर खाना पेश करूँगा।" हज़रत ने साफ़ इंकार फ़रमा दिया। वह थानेदार एक दम ग़ुस्सा हो गया और कहा कि "आप न बुज़ुर्ग हैं और न नेक, क्योंकि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया है कि दावत क़बूल करो और आप क़बूल नहीं करते।" इस पर मौलाना नानौतवी ने फ़रमाया कि "जो उयूब (कमियाँ/दोष) तूने बयान किए हैं, मैं उनसे ज़्यादा उयूब का मुर्तकिब (दोषी) और मुस्तहिक़ (हक़दार) हूँ।" उस वक़्त थानेदार को होश आया और उसने सोचा तो मालूम हुआ कि हज़रत मेरी दावत मेरे माल के मुश्तबा (संदिग्ध) होने की वजह से रद्द फ़रमा रहे हैं। उसने उसी दिन से थानेदारी छोड़ दी। कुछ दिनों बाद फिर दावत की और अर्ज़ किया कि: "हज़रत! अब मेरी अपनी जायदाद की हलाल कमाई है, आपकी दावत करता हूँ।" मौलाना मुहम्मद क़ासिम साहब ने दावत मंज़ूर फ़रमाई और उससे फ़रमाया कि "मुलाज़मत (नौकरी) भी करो लेकिन दयानतदारी (ईमानदारी) से काम लो, क्योंकि दयानतदारी के साथ थानेदारी करना तमाम भलाइयों से बढ़कर है, क्योंकि मुहतसिब (जवाबदेही अधिकारी/निरीक्षक) के दर्जे में थानेदार होता है।" ___________📝📝___________ मनक़ूल (उद्धृत)। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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