عربی پنجم

الفوز الکبیر فی اصول التفسیر اردو
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الفوز الکبیر فی اصولِ التفسیر
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الحسامي
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المقامات الحریریۃ
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تلخیص المفتاح
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شرح فتح القدیر
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مبادیٔ الفلسفہ
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معین الفلسفہ
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مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 7
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अल्लाह की मर्ज़ी अल्लाह ही जाने: एक इबरतअंगेज़ वाक़या

अल्लाह की मर्ज़ी अल्लाह ही जाने: एक इबरतअंगेज़ वाक़या

सामान से लदा हुआ एक बहरी जहाज़ (समुद्री जहाज़) महवे-सफ़र था कि तेज़ हवाओं की वजह से वह उलटने लगा। क़रीब था कि जहाज़ डूब जाता, उसमें मौजूद ताज़िरों (व्यापारियों) ने कहा कि बोझ हल्का करने के लिए कुछ सामान समंदर बुर्द (समुद्र में डालना) करते हैं। ताज़िरों ने मशविरा करके तय किया कि सबसे ज़्यादा सामान जिसका हो, वही फेंक देंगे। जहाज़ का ज़्यादातर लोड एक ही ताज़िर का था। उसने एतराज़ किया कि "सिर्फ़ मेरा सामान क्यों? सब के माल में से थोड़ा-थोड़ा फेंक देते हैं।" उन्होंने ज़बरदस्ती उस नए ताज़िर को सामान समेत समंदर में फेंक दिया। क़ुदरत कीशान कि समंदर की मौजें (लहरें) उसके साथ खेलने लगीं। उसे अपनी हलाकत (मौत) का यक़ीन हो गया, जब होश आया तो क्या देखता है कि लहरों ने उसे साहिल (किनारे) पर फेंक दिया है। यह एक ग़ैर-आबाद जज़ीरा (सुनसान द्वीप) था। जान बचने पर उसने रब का शुक्र अदा किया। अपनी सांसें बहाल कीं, वहाँ पड़ी लकड़ियों को जमा करके सर छुपाने के लिए एक झोंपड़ी सी बनाई। अगले दिन उसे कुछ ख़रगोश भी नज़र आए। उनका शिकार करके गुज़र-बसर करता रहा। एक दिन ऐसा हुआ कि वह खाना पका रहा था कि उसकी झोंपड़ी को आग लग गई। उसने बहुत कोशिश की, मगर आग पर क़ाबू न पा सका। उसने ज़ोर से पुकारना शुरू किया, "तूने मुझे समंदर में फेंक दिया। मेरा सारा सामान ग़र्क़ (डूब) हो गया। अब यही झोंपड़ी थी मेरी कुल क़ायनात, इसे भी जलाकर राख कर दिया। अब मैं क्या करूँ?" यह शिकवा करके वह ख़ाली पेट सो गया। सुबह जागा तो अजीब मंज़र था। देखा कि एक कश्ती साहिल पर लगी है और मल्लाह (नाविक) उसे लेने आए हैं। उसने मल्लाहों से पूछा कि "तुम्हें मेरे बारे में कैसे पता चला?" उन्होंने जो जवाब दिया, उससे ताज़िर हैरान रह गया। मल्लाहों ने कहा कि: "हमें पता था कि यह जज़ीरा ग़ैर-आबाद है, लेकिन दूर से धुआँ उठता हुआ नज़र आया तो समझे शायद कोई यहाँ फँसा हुआ है, जिसे बचाना चाहिए। इसलिए हम तुम्हारे पास आए।" फिर ताज़िर ने अपना पूरा क़िस्सा सुनाया तो मल्लाहों ने यह कहकर उसे मज़ीद (और भी) हैरान कर दिया कि जिस जहाज़ से तुम्हें समंदर में फेंका गया था, वह आगे जाकर ग़र्क़ हो गया। यह सुनकर ताज़िर सज्दे में गिर गया, रब का शुक्र अदा करने लगा और कहा कि पाक है वह ज़ात जिसने मुझे बचाने के लिए ताज़िरों के हाथों समंदर में फिंकवाया। अपने बंदों के बारे में वही ज़्यादा जानने वाला है। तन्बीह (चेतावनी): हालात जितने भी सख़्त हो जाएं, अल्लाह की रहमत से मायूस न हों। हर हाल में अपने रब पर भरोसा रखिए, क्योंकि वह बेहतर जानता है। ___________📝📝___________ मनक़ूल। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप ___________📝📝___________

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