عربی ششم

احسن الھدایہ شرحِ اردو ہدایہ 11
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احسن الھدایہ شرحِ اردو ہدایہ 10
احسن الھدایہ شرحِ اردو ہدایہ 10
احسن الھدایہ شرحِ اردو ہدایہ 9
احسن الھدایہ شرحِ اردو ہدایہ 9
احسن الھدایہ شرحِ اردو ہدایہ 8
احسن الھدایہ شرحِ اردو ہدایہ 8
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد  1
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد 1
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد  2
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد 2
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد  3
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد 3
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد  4
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد 4
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد  5
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد 5

एक बुजुर्ग की लोग उनके मुंह पर तारीफ कर रहे थे

एक बुजुर्ग की लोग उनके मुंह पर तारीफ कर रहे थे

मौलाना फखरुल हसन साहब गंगोही रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं कि मैं मक्का मुअज्जमा में एक बुजुर्ग की खिदमत में हाजिर हुआ, लोग उनके मुंह पर उनकी तारीफ कर रहे थे और वह खुश हो रहे थे। मैंने अपने दिल में कहा, 'यह कैसे बुजुर्ग हैं जो अपनी तारीफ से मजे ले रहे हैं!' उन्हें इस खयाल की इत्तिला हो गई, उन्होंने फौरन जवाब दिया, 'यह मेरी तारीफ थोड़ी ही है। यह मेरे महबूब (अल्लाह) की तारीफ है, क्योंकि हमारा सारा कमाल उधर से ही है। मसनूअ (बनाई हुई चीज) की तारीफ हकीकत में सानेअ (बनाने वाले) की तारीफ है कि उसने कितनी खूबी से इस चीज को बनाया है, इसलिए मैं महबूब की तारीफ पर खुश हो रहा हूँ।' वह कहने लगे कि मुझे फिर खयाल आया कि जब यही बात है तो मेरा यह खयाल भी महबूब ही की तरफ से था, फिर इस पर इतनी नागोवारी (नापसंदगी) क्यों हुई? उन्हें इस पर भी इत्तिला हो गई, फरमाया, 'महबूब की तरफ बुरी बातों की निस्बत करना बेअदबी है।' अब तो मैं बहुत घबराया कि यहाँ दिल को संभाल कर बैठना चाहिए, ये तो हर खयाल पर मुत्तलअ (वाकिफ) हो जाते हैं। वाकई अहलेुल्लाह (अल्लाह वाले) के पास बैठकर बुरे खयालात से दिल की हिफाजत करनी चाहिए, क्योंकि उन्हें कभी-कभी खयालात पर भी इत्तिला हो जाती है, जिससे उन्हें ईजा (तकलीफ) होती है। "पेशे अहले दिल निगहदारैद दिल, ता नबाशेद अज़ गुमाने बद ख़िजिल" अहले दिल के रूबरू दिल की निगहदाश्त (हिफाजत) करो ताकि बदगुमानी से शर्मिंदा न होना पड़े। (खुतबात-ए-हकीमुल उम्मत जिल्द 22 / सफा: 375, 376) __________📝📝__________ (किताब: जवाहर-ए-खुतबात सफा नंबर: 293, तालीफ: उस्ताजुल कुर्रा कारी जियाउर रहमान साहब, इंतेखाब: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)

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