عربی ششم

ترجمہ العقیدۃ الطحاویۃ
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سراجی کا حساب
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المنحۃ الالھيۃ فی شرح السراجیۃ
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تلخیص الفرائض علی السراجی
تلخیص الفرائض علی السراجی
الشریفیۃ شرح السراجیۃ
الشریفیۃ شرح السراجیۃ
تشریح الہدایہ شرح اردو ہدایہ جلد ۷
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تشریح الہدایہ شرح اردو ہدایہ جلد ۸
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تشریح الہدایہ شرح اردو ہدایہ جلد ۹
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تشریح الہدایہ شرح اردو ہدایہ جلد ۱۰
تشریح الہدایہ شرح اردو ہدایہ جلد ۱۰

पागल टैक्सी ड्राइवर — (एक खामोश हीरो की कहानी)

पागल टैक्सी ड्राइवर — (एक खामोश हीरो की कहानी)

इमरजेंसी वार्ड की गहमागहमी में एक अजनबी दाखिल हुआ। कंधों पर वक्त का बोझ, हाथों में एक बेहोश औरत, और पीछे दो बच्चे, जिनके चेहरों पर खौफ और आंखों में नमी थी। डॉक्टर ने मरीज को देखा, दिल पर हाथ रखा और सर्द लहजे में बोला, "हार्ट अटैक है। तुरंत इलाज जरूरी है, वरना बचना मुश्किल है।" यह सुनकर बच्चे मां से लिपट कर रोने लगे। वह अजनबी—एक पुराने कपड़ों में मलबूस (लिपटा हुआ) बूढ़ा शख्स—कभी औरत की तरफ देखता, कभी बच्चों की तरफ, और कभी डॉक्टर की आंखों में उम्मीद ढूंढने लगता। डॉक्टर ने नरमी से पूछा, "यह आपकी क्या लगती हैं?" उसने सर झुकाकर आहिस्ता से कहा, "कुछ नहीं… मैं टैक्सी चलाता हूं। सड़क किनारे पड़ी मिलीं… बच्चे रो रहे थे… दिल न माना… बस ले आया।" फिर उसने जेब में हाथ डालकर चंद मुड़े-तुड़े नोट निकाले और डॉक्टर की मेज पर रख दिए, "यही है मेरे पास… बाकी अल्लाह करेगा।" डॉक्टर ने नोट देखे और हल्का सा मुस्कुरा कर कहा, "बाबा जी, यह तो बहुत कम हैं। इलाज महंगा है…" बूढ़ा टैक्सी ड्राइवर हार मानने वाला नहीं था। दीवारों को देखते, आसमान की तरफ नजरें उठाए, उसके चेहरे पर यकायक एक रोशनी सी जागी। "डॉक्टर साहब! आप इलाज शुरू करें। यह लीजिए मेरी गाड़ी के कागजात, मैं अभी पैसे लेकर आता हूं।" यह कहकर वह तेजी से निकल गया। थोड़ी देर बाद दो अजनबी मर्दों को साथ लेकर वापस आया। हाथ में नकद रकम थी, और आंखों में शुक्र का सा नूर। "टैक्सी बेच दी है। पैसे ले लीजिए, बस इसकी जान बचा लीजिए।" पास खड़ा एक यूवान हैरत से पूछ बैठा, "यह औरत आपकी क्या लगती है?" बूढ़ा मुस्कुराया, "कुछ भी नहीं। लेकिन दिल कहता है कि कुछ तो रिश्ता है… जो मुझे अपनी टैक्सी से ज्यादा इसकी जिंदगी अजीज लगी। टैक्सी तो फिर मिल जाएगी, मगर अगर यह मर गई तो यह बच्चे जीते जी मर जाएंगे। और कयामत के दिन मैं रब को क्या मुंह दिखाऊंगा?" पास खड़े खरीदार अब खामोश थे। एक ने आहिस्ता से बोला, "अपने पैसे वापस रखो बाबा, टैक्सी भी तुम्हारी और नेकी का अजर (इनाम) भी। हम इलाज के पैसे देंगे।" दूसरा भी हां में हां मिलाते हुए बोले, "हम सौदे के लिए आए थे, नेकी मिल गई। सत्तर गुना मुनाफा मिला है।" वह पैसे मेज पर रखकर चले गए, और जाते-जाते कहा, "डॉक्टर साहब, अगर और जरूरत हो तो कॉल कीजिएगा, यह हमारा कार्ड है।" बूढ़ा वहीं खड़ा, नम आंखों से उनके कदमों को जाता देखता रहा, और फिर धीरे से कह उठा: "बाबू… अल्लाह को मेरी टैक्सी पसंद नहीं आई… नेकी पैसे वालों के नसीब में चली गई… और मैं? मैं तो फिर खाली हाथ रह गया।" मगर शायद वह नहीं जानता था कि जो हाथ खाली होते हैं, वही आसमान की तरफ सबसे पहले उठते हैं… और जो दिल नेकी से भर जाए, उसका नसीब कभी खाली नहीं होता।

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