عربی ششم

الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 6
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 6
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 7
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 7
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 8
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 8
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 9
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 9
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 10
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 10
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 11
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 11
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 12
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 12
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 13
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 13
الرفیق الفصیح لمشکوۃ المصابیح جلد 14
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क़ाज़ी का एक अजीब और हिकमत भरा फ़ैसला

क़ाज़ी का एक अजीब और हिकमत भरा फ़ैसला

एक रियासत में एक बूढ़े शख़्स को रोटी चोरी करते हुए पकड़ा गया। इलाक़े के कुछ लोग उसे पकड़कर वक़्त के क़ाज़ी (जज) के पास ले गए। क़ाज़ी ने बूढ़े बाबा से काफ़ी सवाल किए, लेकिन बाबा ने कोई जवाब नहीं दिया। आख़िरकार क़ाज़ी ने फ़ैसला इस तरह सुनाया: "बाबा जी रोटी चोरी करने के जुर्म में एक दिरहम तंदूर के मालिक को बतौर जुर्माना अदा करेंगे।" यह सुनते ही लोगों ने फ़ातिहाना (जीत के) नारे लगाने शुरू कर दिए। क़ाज़ी साहब ने कहा, "ठहरो अभी, फ़ैसले की दूसरी क़िस्त अभी बाक़ी है।" सब लोग समझे कि अब शायद बाबा को क़ैद की सज़ा भी होगी, लेकिन क़ाज़ी के फ़ैसले ने सबको हैरत में डाल दिया। क़ाज़ी ने गरजदार आवाज़ में फ़ैसला सुनाया, "जितने लोग बाबा जी को पकड़कर लाए हैं वे सब, और जो लोग बाबा जी के घर के आस-पास की तीन गलियों में रहते हैं वे सब, हर महीने की पहली तारीख़ को पचास दिरहम बाबा जी को बतौर जुर्माना अदा करेंगे।" लोगों ने इसकी वजह पूछी तो क़ाज़ी ने जवाब दिया, "न बाबा की उम्र चोरी की है और न बाबा पेशेवर चोर लगते हैं, क्योंकि अगर चोर होते तो अपनी सफ़ाई अच्छे अंदाज़ से पेश करते जैसा कि चोरों का दस्तूर होता है। बाबा जी को भूख ने चोरी तक पहुँचाया है। इसका सबसे बड़ा सबब (कारण) बाबा के पड़ोसी हैं, जिन्होंने कभी बाबा की ख़बर न ली। इसलिए बाबा एक रोटी के चोर हैं, जबकि बाबा जी का पूरा मोहल्ला इंसानियत का चोर है।" "जो सज़ा मैंने सुनाई है, हक़ीक़त में वह तुम्हारा फ़रीज़ा (कर्तव्य) था जो तुम अदा न कर सके, इसलिए इसे जुर्म का नाम दिया गया।" क़ाज़ी के फ़ैसले ने बाबा जी की आँखों से आँसू निकाल दिए, जबकि तमाशबीनों (दर्शकों) की गर्दन झुका दी। ___________📝📝___________ मनक़ूल। चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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