عربی ششم

الکاملة لحل اسئلة الکتب الخمسہ
الکاملة لحل اسئلة الکتب الخمسہ
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٥
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٥
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٦
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٦
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٧
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٧
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٨
عین الہدایہ اردو شرح ہدایہ جلد ٨
کتاب التعریفات
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اثمار الہدایہ علی الہدایہ جلد ٨
اثمار الہدایہ علی الہدایہ جلد ٨
اثمار الہدایہ علی الہدایہ جلد ٩
اثمار الہدایہ علی الہدایہ جلد ٩
اثمار الہدایہ علی الہدایہ جلد ١٢
اثمار الہدایہ علی الہدایہ جلد ١٢

ये हालात बदलते क्यों नहीं?

ये हालात बदलते क्यों नहीं?

मुही-उस-सुन्नत हज़रत शाह अबरार-उल-हक़ से कुछ लोगों ने शिकायत की कि मुसलमानों की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं, खानक़ाहों और मदरसों में दुआओं का खूब प्रबंध हो रहा है, अल्लाह वाले लगातार अल्लाह के हुज़ूर दुआएं कर रहे हैं, लेकिन मुसलमानों की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं और हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। तो उस समय हज़रत ने एक उदाहरण देकर मामले को इस तरह समझाया था कि यदि किसी व्यक्ति का पिता उससे नाराज़ हो जाए और उसकी नाराज़गी के कारण उस पर अपनी कृपा का सिलसिला बंद कर दे, और वह लड़का अपने पिता से सीधे माफी मांगने और सुलह करने के बजाय दूसरों से कहता फिरे कि "मेरे पिता मुझसे नाराज़ हैं, आप उनसे सिफ़ारिश कर दीजिए कि वह मुझसे राज़ी हो जाएं और पहले जैसा प्यार करने लगें," और खुद सीधे पिता से संपर्क न करे, न ही उनके सामने अपने अपराध को स्वीकार करे, तो पिता की कृपा-दृष्टि उस पर कैसे होगी? इस समय पूरी उम्मत (समुदाय) का मर्सिया (त्रासदी) यही है कि वे खुद तो ब्रह्मांड के निर्माता (ख़ालिक़-ए-क़ायनात) के हुज़ूर में गुस्ताखियां और अपराध करते हैं, और उनकी माफ़ी के लिए अल्लाह वालों और बुजुर्गों (मशाइख़) से दुआएं कराते फिरते हैं, लेकिन खुद अल्लाह के हुज़ूर तौबा और इस्तगफ़ार (क्षमा याचना) की कोशिश और ज़रूरत महसूस नहीं करते। अल्लाह की राह अब भी है खुली, आसार व निशां सब क़ायम हैं; अल्लाह के बंदों ने लेकिन इस राह में चलना छोड़ दिया। _____________________________________ (किताब: माहनामा मज़ाहिरुल-उलूम सहारनपुर (नवंबर) सफ़्हा नंबर: ६ चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)

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