عربی ششم

توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد  6
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد 6
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد  7
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد 7
توضیحات اردو شرح مشکوۃ المصابیح جلد 8
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مختصر المعانی
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تسہیل المیبذی
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اشرف المرضی شرحِ اردو میبذی
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متن العقیدۃ الطحاویۃ
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توضیح المیبذی
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المیبذی
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विद्वानों और गणमान्य लोगों में कोमलता और मधुर स्वभाव की आवश्यकता

विद्वानों और गणमान्य लोगों में कोमलता और मधुर स्वभाव की आवश्यकता

विद्वानों और गणमान्य लोगों (خواص) के वर्ग में कोमलता और मधुर स्वभाव होना अत्यंत आवश्यक है। सख्त लहजे में बात करना और किसी बात पर नाराज़ होना, अगर सुधार और तरबियत (परवरिश) की भावना से हो, तो ज़ाहिर है कि इसमें कोई हर्ज नहीं है। लेकिन, अगर इसका मक़सद सिर्फ अपने गुस्से को शांत करना और अपने दिल की भड़ास निकालना हो, तो यह विद्वानों और गणमान्य लोगों की शान के खिलाफ है। अगर किसी आम आदमी से कोई ऐसी बात हो जाए जो गणमान्य लोगों की प्रकृति और मिज़ाज के खिलाफ हो, तो तुरंत उत्तेजित (गुस्सा) नहीं होना चाहिए। ज़ाहिर है कि आमतौर पर एक आम और अज्ञानी आदमी के बातचीत का अंदाज़ साधारण (आमियाना) होता है, उसे विद्वानों और गणमान्य लोगों से बातचीत के आदाब (शिष्टाचार) मालूम नहीं होते। अब अगर गणमान्य लोग भी उससे उलझ जाएं, तो वह आम आदमी जो किसी आलिमे-दीन (धार्मिक विद्वान) के पास आया था—चाहे उसका मक़सद कुछ भी रहा हो, दुनिया का हो या आख़िरत का—जब आलिम उससे गैर-संजिदा (अपरिपक्व) बातचीत करेगा और उसकी तरफ से कोई नागवार बात सामने आने पर सख्त और कड़ा लहजा अख्तियार करेगा, तो ज़ाहिर है कि वह आम आदमी उससे दूर और बेज़ार हो जाएगा, और उस आलिमे-दीन से दोबारा मिलने और उनकी फ़ैज़ वाली सोहबत (संगति) से फायदा उठाने से कतराएगा। इसके विपरीत, अगर आलिमे-दीन उसकी तरफ से पेश आने वाली नापसंद बात पर सब्र व तहम्मुुल (धैर्य) से काम ले, और उसकी गैर-संजिदा बातचीत के जवाब में संजिदा और नर्म अंदाज़ में बात करे, तो एक तो उसे विद्वानों की तरफ से एक अच्छा और सकारात्मक संदेश जाएगा, दूसरे विद्वानों का यह गरिमामयी और शरीफ़ाना व्यवहार उसे प्रभावित किए बिना नहीं छोड़ेगा। क्या पता वह इससे प्रभावित होकर विद्वानों की संगति को लाज़िम (अनिवार्य) पकड़ ले, और उसकी दुनिया व आख़िरत दोनों सँवर जाएँ। अल्लाह तबारक व तआला हमें इस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। अन्य विद्वानों तक इस विशेष संदेश को पहुँचाकर दोनों जहानों का सवाब हासिल करें। ____________🌹🌹____________ (किताब: माहनामा ज़ाद उस-सईद कराची (नवंबर) सफ़्हा नंबर: २८ चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप)

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