عربی ششم

جلالین کلاں
جلالین کلاں
مظاہر حق جلد 1
مظاہر حق جلد 1
مظاہر حق جلد 2
مظاہر حق جلد 2
مظاہر حق جلد 3
مظاہر حق جلد 3
مظاہر حق جلد 4
مظاہر حق جلد 4
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 1
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 1
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 2
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 2
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 3
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 3
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 4
مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 4

अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन। ८. जब तुझे वह हादसा मौत का पेश आएगा जिसको कोई नहीं टाल सकता, तो माल-ओ-दौलत और नौकर-ओ-ख़ादिम तेरे कुछ भी काम न आएँगे। ९. उस वक़्त डॉक्टर, हकीम, दोस्त व रिश्तेदार और सब घर वाले तुझे बचाने की तरकीबें ख़त्म करके मायूस (निराश) हो जाएँगे और तेरे पास से उठ खड़े होंगे। १०. तुझ पर नज़अ (मृत्यु की पीड़ा) का आलम तारी होगा, कोई तेरे मुँह में चमचे से पानी पिलाएगा, कोई सूरह यासीन सुनाएगा। ११. तेरा दम निकल जाने के बाद तेरे जिस्म से लिबास (कपड़े) उतार कर तुझे कफ़न की दो चादरों में लपेट दिया जाएगा। १२. तुझे ज़मीन की तह में अकेला छोड़ देंगे और नज़रों से ओझल कर देंगे। १३. कोई कहेगा, बड़ा अच्छा बाप था; कोई कहेगा, बड़ा अच्छा दोस्त था; कोई कहेगा, बड़ा नेक था। १४. याद रख! हसीनों और नाज़नीनों की मोहब्बत सरासर बदक़िस्मती और नदामत (शर्मिंदगी) है। तेरा यह हर रोज़ सुबह-ओ-शाम का बनना सँवरना, नाच गाना और हम-नशीनों के साथ दिन रात खाते पीते, ऐश-ओ-इशरत की रंग-रलियाँ मनाने का अंजाम आख़िरत की ज़िल्लत व रुसवाई के सिवा और कुछ नहीं है। १५. अब भी वक़्त है, मेरा कहा मान जा, कि हर महबूब की मोहब्बत से दस्तबरदार (पीछे हटकर) होकर हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रिश्ता, मोहब्बत व उल्फ़त का जोड़ ले और दिल-ओ-जान से हर काम में उनकी पूरी फ़रमांबरदारी और इताअत गुज़ारी कर और उन्हीं पर तू अपनी नजात की उम्मीद और भरोसा रख। १६. हुज़ूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वासल्लम की मोहब्बत इंसान के लिए दीन व दुनिया में इज़्ज़त, क़ब्र में सामान-ए-उन्सियत (सुकून का सामान) और आख़िरत का बेहतरीन ज़ख़ीरा और तोशा (पाथेय) है। ____________📝📝____________ किताब: माहनामा फलाह-ए-दारैन कराची (जून) पेज नंबर: २९ - ३० चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

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