عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

احسان الباری لفہم البخاری
احسان الباری لفہم البخاری
فضل الباری فی درس البخاری جلد ۱
فضل الباری فی درس البخاری جلد ۱
فضل الباری فی درس البخاری جلد ۲
فضل الباری فی درس البخاری جلد ۲
فضل الباری فی درس البخاری جلد ۳
فضل الباری فی درس البخاری جلد ۳
فضل الباری فی درس البخاری جلد ۴
فضل الباری فی درس البخاری جلد ۴
درس شمائل ترمذی
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القول النقی فی شرح جامع الترمذی جلد ۱
القول النقی فی شرح جامع الترمذی جلد ۱
القول النقی فی شرح جامع الترمذی جلد ۲
القول النقی فی شرح جامع الترمذی جلد ۲
القول النقی فی شرح جامع الترمذی جلد ۳
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हज़रत यूसुफ़ और मूसा: क़ुरआनी मुवाज़ना और तदब्बुर

हज़रत यूसुफ़ और मूसा: क़ुरआनी मुवाज़ना और तदब्बुर

जब हज़रत यूसुफ़ को कुएँ में डाला गया तो हज़रत मूसा को भी पानी में डाला गया। हज़रत यूसुफ़ मिस्र में थे तो हज़रत मूसा भी मिस्र में थे। हज़रत यूसुफ़ ने महल में ज़िंदगी गुज़ारी तो हज़रत मूसा ने भी फ़िरऔन के महल में परवरिश पाई। हज़रत यूसुफ़ को उठाने वालों की भी औलाद नहीं थी और हज़रत मूसा को उठाने वालों की भी औलाद नहीं थी। हज़रत यूसुफ़ को उठाने वालों ने भी कहा: عَسٰۤى اَنْ یَّنْفَعَنَاۤ اَوْ نَتَّخِذَهٗ وَلَدًا कुछ बईद नहीं कि यह हमें फ़ायदा पहुँचाए या हम इसे बेटा बना लें। (सूरत यूसुफ़: 21) हज़रत मूसा को उठाने वालों ने भी कहा: عَسٰۤى اَنْ یَّنْفَعَنَاۤ اَوْ نَتَّخِذَهٗ وَلَدًا कुछ बईद नहीं कि यह हमें फ़ायदा पहुँचाए या हम इसे बेटा बना लें। (सूरत क़सस: 9) हज़रत यूसुफ़ को उठाने वालों के बारे में कहा: لَا یَعْلَمُوْنَ वो जानते नहीं हज़रत मूसा को उठाने वालों के बारे में भी कहा: لَا یَشعُرُون उन्हें अंजाम का पता नहीं। हज़रत यूसुफ़ के भाइयों ने कहा: اقْتُلُوْا یُوْسُفَ यूसुफ़ को क़त्ल कर डालो। हज़रत मूसा के बारे में फ़िरऔन ने कहा: ذَرُوْنِیْۤ اَقْتُلْ مُوْسٰى मुझे छोड़ो ताकि मैं मूसा को क़त्ल कर दूँ। (सूरत क़सस: 26) यूसुफ़ के भाइयों ने एक चाल चली और वह नाकाम हुई। فَیَكِیْدُوْا لَكَ كَیْدً (ऐ यूसुफ़!) वो तेरे साथ कोई चाल चलेंगे। मूसा के ख़िलाफ़ भी परवरिश करने वालों ने चाल चली और नाकाम हुई: وَمَا كَيْدُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ और काफ़िरों की चाल का अंजाम इसके सिवा कुछ नहीं कि वो मक़सद तक न पहुँच सकें। हज़रत यूसुफ़ को भी जेल में एक दोस्त मिल गया था जो बाद में जेल से निकालने का सबब बना। हज़रत मूसा को भी एक दोस्त मिल गया था जो मिस्र से मदयन की तरफ़ निकालने का सबब बना। हज़रत यूसुफ़ के बारे में कहा कि हमने उन्हें हिकमत और इल्म अता किया था, हज़रत मूसा के बारे में भी कहा कि हमने उन्हें हिकमत और इल्म अता किया था। हज़रत यूसुफ़ को हुस्न दे कर और हज़रत मूसा को ताक़त दे कर आज़माया गया। इतनी गहरी मुनासबत के बावजूद जब हज़रत मूसा ने फ़िरऔन और उसके मानने वालों को दावत दी तो उन्होंने कहा: مَا سَمِعْنَا بِهٰذَا فِیْۤ اٰبَآئِنَا الْاَوَّلِیْنَ और हमने यह बात पिछले बाप-दादाओं में नहीं सुनी। (क़सस: 36) फ़िरऔनियों की इस बात से ऐसे मालूम होता है जैसे वो सच बोल रहे हों और वाक़ई उन्हें कुछ पता न हो और उनके बाप-दादाओं में कोई नबी न आया हो। लेकिन सूरत मोमिन की आयत नंबर 34 में अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि मूसा अलैहिस्सलाम पर ईमान लाने वाले एक शख़्स ने फ़िरऔनियों से कहा: وَ لَقَدْ جَآءَكُمْ یُوْسُفُ مِنْ قَبْلُ بِالْبَیِّنٰتِ فَمَا زِلْتُمْ فِیْ شَكٍّ مِّمَّا جَآءَكُمْ بِهٖؕ-حَتّٰۤى اِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَنْ یَّبْعَثَ اللّٰهُ مِنْۢ بَعْدِهٖ رَسُوْلًاؕ-كَذٰلِكَ یُضِلُّ اللّٰهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُّرْتَابُ और हक़ीक़त यह है कि इससे पहले यूसुफ़ तुम्हारे (आबा-ओ-अजदाद) के पास रौशन दलीलें लेकर आए थे। तब भी तुम उनकी लाई हुई बातों के मुताल्लिक़ शक में पड़े रहे। फिर जब वो वफ़ात पा गए तो तुमने कहा कि उनके बाद अल्लाह अब कोई पैग़ंबर नहीं भेजेगा। इसी तरह अल्लाह उन तमाम लोगों को गुमराही में डाले रखता है जो हद से गुज़रे हुए, शक्की होते हैं। सुभान अल्लाह! क्या ही ख़ूबसूरत अंदाज़ है! क्या ही ख़ूबसूरत तदबीर है हमारे रब की! क्या ही उम्दा तरीक़े से क़ाफ़िला-ए-ख़ैर की कड़ियाँ जुड़ती हैं! वक़्त महदूद है, क़ुरआन समुंदर है, मोती बे-शुमार हैं, कैसे और किस-किस पहलू से क़ुरआन में ग़ौर करें? काश दुनिया में और कोई मसरूफ़ियत न होती, बस सिर्फ़ रब के कलाम में ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना होता। ऐ क़ुरआन उतारने वाले करीम रब! जन्नत में हमें ज़रूर अपने कलाम के मफ़ाहीम समझाइएगा ताकि हम इस बहरे-नापैदा-कनार से सैराब हो सकें। _____📝📝📝_____मनक़ूल। इंतेख़ाब इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप।

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