عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

تشریحات بُخاری اردو جلد 6
تشریحات بُخاری اردو جلد 6
تشریحات بُخاری اردو جلد 7
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انعام الباری جلد 1
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انعام الباری جلد 2
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انعام الباری جلد 3
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انعام الباری جلد 4
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انعام الباری جلد 5
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انعام الباری جلد 6
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انعام الباری جلد 7
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ईसाई धर्म का सांस्कृतिक आक्रमण!!

ईसाई धर्म का सांस्कृतिक आक्रमण!!

जब तक ईसाई धर्म राजनीति से तालमेल में नहीं था, तब तक दुनिया की हर कौम (राष्ट्र) का अपना एक अलग पहनावा होता था। अब भी जहाँ-जहाँ ईसाई धर्म किसी कौम की राजनीति पर असरअंदाज़ नहीं हुआ है, वहाँ अब भी उस कौम का अपना एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहनावा है। जिन देशों में ईसाई धर्म राजनीति के साथ मिलकर पहुँचा, वहाँ का राष्ट्रीय पहनावा महमूद गजनवी के चहेते गुलाम अयाज़ के "गुलामी के लिबास" की तरह पुराने संदूक में छुपा दिया गया है, जिसे कभी-कभार ईद के त्योहार पर महज़ पुरानी याद ताज़ा करने के लिए निकाला जाता है। चुनाँचे (इसीलिए) ईसाइयत का लिबास—कोट, पतलून और टाई—अब एक अंतर्राष्ट्रीय पहनावा बन गया है, जिसे अब ईसाइयों के अलावा हर धर्म, हर देश और हर कौम के बाशिंदे (निवासी) पहनते हैं। जहाँ तक कोट-पतलून वाले लिबास का ताल्लुक है, उसे देखकर किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। हाँ अलबत्ता, चेहरे के रंग या बोली जाने वाली भाषा से पता लगाया जा सकता है कि फलां व्यक्ति अमेरिकी है या फलां व्यक्ति पाकिस्तानी। (प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार इब्राहिम जलीस की किताब "ऊपर शेरवानी अंदर परेशानी" से उद्धृत)

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