عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٣
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٣
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٤
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٤
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٥
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٥
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٦
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٦
زبدة الشمائل شرح شمائل ترمذی
زبدة الشمائل شرح شمائل ترمذی
صحاح ستہ اور ان کے مصنفین
صحاح ستہ اور ان کے مصنفین
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ١
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ١
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٢
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٢
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٣
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٣

शासक हो तो ऐसा! मदायन के गवर्नर हज़रत सलमान फ़ारसी की बेमिसाल सादगी

शासक हो तो ऐसा! मदायन के गवर्नर हज़रत सलमान फ़ारसी की बेमिसाल सादगी

हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ि.) एक बहुत महान सहाबी (पैगंबर के साथी) थे। सभी सहाबा इकराम में उन्होंने सबसे लंबी उम्र पाई थी। वह सभी लोगों की सेवा करते थे और बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करते थे। हज़रत उमर (रज़ि.) ने अपने शासनकाल के दौरान उन्हें मदायन शहर का गवर्नर बना दिया था; लेकिन हज़रत सलमान फ़ारसी की सादगी के कारण नए लोग उन्हें देखकर समझ ही नहीं पाते थे कि यह मदायन शहर के गवर्नर हैं; बल्कि उन्हें एक आम आदमी समझकर उनसे सेवा भी ले लिया करते थे और हज़रत सलमान फ़ारसी भी गवर्नर होने के बावजूद बिना किसी झिझक या शर्म के उनकी सेवा कर दिया करते थे। एक बार की बात है कि हज़रत सलमान फ़ारसी एक आम आदमी की तरह मदायन की सड़क पर घूम रहे थे। सीरिया (शाम) देश का एक व्यापारी अपना व्यापारिक सामान बेचने के लिए मदायन आ रहा था। उस व्यापारी ने हज़रत सलमान फ़ारसी को देखकर समझा कि यह कोई मज़दूर है; इसलिए उसने उन्हें बुलाया और कहा कि मेरा सामान उठाकर फलां जगह ले चलो। हज़रत सलमान फ़ारसी भी बिना किसी संकोच के उस व्यापारी का सामान उठाकर चल दिए। कुछ देर बाद जब मदायन के नागरिकों ने हज़रत सलमान फ़ारसी को सामान उठाए हुए देखा, तो उस सीरियाई व्यापारी से कहा: "अरे! ये तो मदायन के गवर्नर हैं! तुम इनसे बोझ उठवा रहे हो!" यह सुनकर वह व्यापारी घबरा गया और शर्मिंदा होकर हज़रत सलमान फ़ारसी से मिन्नत करने लगा: "हज़रत! मैं आपको पहचान नहीं सका; इसलिए आपके साथ यह गुस्ताखी हो गई, मुझे माफ़ कर दें और सामान मुझे दे दें, मैं खुद लेकर चला जाऊँगा।" लेकिन हज़रत सलमान फ़ारसी अपने सिर से सामान उतारने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हुए; बल्कि फरमाया: "मैंने एक नेकी (पुण्य) की नीयत कर ली है, जब तक वह पूरी नहीं होगी, मैं यह सामान नहीं उतारूँगा।" फिर उन्होंने वह सामान उसके ठिकाने तक पहुँचा दिया। (तबाकात इब्न साद अल-बसरी: 5/68) ___________📝📝📝___________ मनकूल (साभार) चयन: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप

सबसे हालिया

Naats