عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

تسہیل النسائی شرح نسائی شریف(کتاب البیوع)
تسہیل النسائی شرح نسائی شریف(کتاب البیوع)
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الاول
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الاول
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الثانی
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الثانی
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الثالث
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الثالث
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الرابع
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الرابع
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الخامس
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الخامس
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء السادس
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء السادس
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء السابع
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء السابع
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الثامن
تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذی الجزء الثامن

मृत्यु के बाद की तल्ख़ हक़ीक़त

मृत्यु के बाद की तल्ख़ हक़ीक़त

आपको दफ़नाकर वापस आते ही आपके परिजनों (घरवालों) का ध्यान रुख़सत होते हुए (जाने वाले) मेहमानों के खाने के बंदोबस्त की तरफ़ जाएगा कि उन्हें खाना खिलाकर रुख़सत करते हैं। एक हफ़्ता गुज़रेगा, आपके बच्चों के स्कूल वापसी का सिलसिला शुरू हो जाएगा। दो हफ़्ते गुज़रेंगे, अफ़सोस (शोक) करने वालों का आना-जाना बंद हो जाएगा। तीन हफ़्तों तक आपकी क़ब्र की ज़ियारत (जाना) रोज़ाना से घटकर दो या तीन दिन बाद पर आ जाएगी। एक महीना गुज़रेगा, घर में वापस टीवी चलना शुरू हो जाएगा। तक़रीबन डेढ़ महीने बाद आपके बच्चे वापस फ़िल्मों, गानों और कार्टून्स की जानिब (तरफ़) आ जाएँगे। आपकी क़ब्र की ज़ियारत जुमा-जुमा यानी हर सातवें दिन हो जाएगी। दो महीने तक आपकी बीवी या शौहर किसी बात पर हंस लिया करेंगे, थोड़ा मुस्कुरा लिया करेंगे। चार महीने तक घर में वापस बॉलीवुड और हॉलीवुड मूवीज़ और गानों का मुकम्मल (पूर्ण) राज हो चुका होगा। मज़ाहिया (हास्यप्रद) बातों पर क़हक़हे गूँज रहे होंगे। छह महीने गुज़रे, आपकी क़ब्र पर अब महीने में एक बार चक्कर लगता है। एक साल गुज़रा और घरवाले सोचेंगे: "आज पूरा साल हो गया। आख़िरी बार क़ब्र पर कब गए थे? शायद एक महीना पहले? आख़िरी बार दुआ कब की थी? शायद याद भी नहीं।" यक़ीन करें आप जितने भी बड़े तोप (रसूख़दार) क्यों न हों, महज़ एक साल में आप सूरा-ए-दहर की पहली आयत का अमली नमूना (जीवंत उदाहरण) होंगे: "इंसान पर एक ऐसा दौर भी था कि वह कुछ न था।" बेशक यह पैदाइश (जन्म) से पहले की बात है। आप इसे वफ़ात (मृत्यु) के बाद भी सोच लें। हम और आप चाहे जितने भी लोगों के महबूब (प्रिय) क्यों न हों, हम कुछ नहीं हैं, हमारी औक़ात कुछ नहीं है... मुख़्तसर (संक्षेप) यह कि अपने लिए नेक अमल (अच्छे कर्म) ख़ुद ही तैयार करें, मरने के बाद किसी के भरोसे पर न रहें...! 🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰

सबसे हालिया

Naats