عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

نصر الباری شرح اردو صحیح البخاری جلد ١٣
نصر الباری شرح اردو صحیح البخاری جلد ١٣
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ١
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ١
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ٢
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ٢
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ٣
فتح اللہ الاحد بتوضيح الادب المفرد جلد ٣
درسی سوال و جواب
درسی سوال و جواب
فیض المنعم شرح اردو مقدّمہ مسلم
فیض المنعم شرح اردو مقدّمہ مسلم
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ١
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ١
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٢
فضل المنعم في شرح صحيح مسلم ٢

ख़ुदा की किबरियाई (महानता)

ख़ुदा की किबरियाई (महानता)

पाकीज़ा है वह ज़ात जिसने सब मख़्लूक़ात (सृष्टि) को फ़ना (नष्ट) करने का फ़ैसला फ़रमाया है। इस हैसियत से बादशाह और ग़ुलाम सब उसके नज़दीक बराबर हुए। सिर्फ़ ख़ुद को बक़ा (अमरता) के साथ मुनफ़रिद (अकेला) किया और क़दामत (शाश्वतता) में भी अपने आप को वाहिद (एक) रखा। अपनी क़ुदरतों को दुनिया वगैरह में जैसे चाहा इस्तेमाल फ़रमाया। सब की हाजतमंदी (ज़रूरत) उसके सामने ज़ाहिर हुई चाहे कोई नेक था या बद (बुरा), गुमराह था या हिदायत (मार्गदर्शन) पर। يَسْاَلُـهٝ مَنْ فِى السَّمَاوَاتِ وَالْاَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِىْ شَاْنٍ (सूरह अर-रहमान: 29) तर्जमा (अनुवाद): आसमानों और ज़मीन में जो भी हैं उसी से (अपनी हाजतें) माँगते हैं, वह हर रोज़ किसी शान में है। वह बड़ा फ़य्याज़ (उदार) है, उसकी अता (दान) ने सब को ढाँप रखा है, यह गुनाहगार कहाँ भाग सकेगा? गुम गश्ता राह (भटके हुए रास्ते) की तलाफ़ी कौन करेगा? कितनी बार ज़ामिन (गारंटर) से क़ज़ा (मौत/तक़्दीर) मुक़ाबला कर चुकी है। कितने मरदूद (दुत्कारे हुए) लोगों को अपनी बारगाह में हाज़िरी की तौफ़ीक़ बख़्शी है। इंसानों की क़िस्मत में गुनाहगारों को कितना ग़ाफ़िल (लापरवाह) कर दिया है, उन्हीं में से कोई बदबख़्त (दुर्भाग्यशाली) बना कोई नेकबख़्त (सौभाग्यशाली)। إحدى وسِتُّون لو مرَّت علی حجرٍ لکان من حُکمھا أن یَخلَقَ الحجرُ تُــؤمِـلُ النّــفـسُ آمــالاً لـتبلُـغَـھَا کأنـھـا لا تــری مـا یــصنَـعُ الـقدر तर्जमा: (❶) अगर इकसठ (61) बरस किसी पत्थर को भी गुज़र जाएँ तो वह भी बोसीदा (जर्जर) पत्थर शुमार होगा। (❷) नफ़्स (मन) बहुत सी उम्मीदों तक पहुँचने की उम्मीद में है, गोया कि उसको यह ख़बर नहीं कि तक़्दीर क्या करने वाली है। _________________________________________________ किताब : आँसुओं का समंदर (आँसूओं का समुन्दर) (पृष्ठ संख्या: 193) लेखक : इमाम इब्न जौज़ी (रहमतुल्लाही अलैहि) अनुवादक : मौलाना मुफ्ती इमदादुल्लाह अनवर साहब

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