عربی ہفتم دورہ حدیث شریف

الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٤
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٤
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٥
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٥
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٦
الدر المنضود شرح سنن ابی داؤد جلد ٦
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ١
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ١
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٢
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٢
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٣
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٣
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٤
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٤
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٥
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٥
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٦
تحفة القاری شرح صحیح البخاری جلد ٦

दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी

दृष्टिकोण का सबक़: उस्ताद, शागिर्द और सेब की कहानी

शागिर्द (छात्र) ग़ौर से सुन रहा था। उस्ताद (शिक्षक) ने पूछा, "अगर मैं तुम्हें एक सेब, और एक सेब, और एक सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कितने सेब हो जाएंगे?" शागिर्द ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, "4।" उस्ताद को लगा कि शायद शागिर्द सवाल ठीक से समझ नहीं पाया। उस्ताद ने इत्मीनान से दोबारा पूछा... "देखो, अगर मैं तुम्हें एक सेब, और एक सेब, और एक सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कुल कितने सेब हो जाएंगे?" शागिर्द सोचने लगा, और कुछ देर सोचने के बाद बोला, "4।" अब उस्ताद थोड़ा हैरान हुआ और उसे ग़ुस्सा भी आया, लेकिन उसने दोबारा वही सवाल किया। इस बार शागिर्द ने उस्ताद के चेहरे पर फैली मायूसी को देखते हुए, काफ़ी सोच-समझकर जवाब दिया और कहा, "4 सेब।" अचानक उस्ताद को याद आया कि शागिर्द को लीची पसंद है। हो सकता है उसे सेब पसंद न हो और इस वजह से वह सवाल पर ध्यान न दे पा रहा हो। लिहाज़ा उस्ताद ने पूछा, "अच्छा बताओ, अगर मैं तुम्हें एक लीची, और एक लीची, और एक लीची दूँ, तो तुम्हारे पास कुल कितनी लीची होंगी?" शागिर्द ने सोचकर जवाब दिया और सवालिया अंदाज़ में कहा, "3??" "बिल्कुल ठीक!" उस्ताद ने ख़ुश होकर कहा और फिर पूछा, "अब बताओ कि अगर मैं तुम्हें एक सेब, और एक सेब, और एक सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कुल कितने सेब होंगे?" "4," शागिर्द ने जवाब दिया। अब उस्ताद को बहुत ग़ुस्सा आया। उसने पहले तो शागिर्द को डांटा और फिर ग़ुस्से में पूछा, "कैसे? कैसे होंगे 4 सेब?!" शागिर्द ने मासूमियत से जवाब दिया: "क्योंकि एक सेब पहले से मेरे बैग में रखा हुआ है।" लिहाज़ा... ग़ुस्सा करने से बेहतर है कि इंसान पहले दूसरों की राय (नज़रिए) को जान ले। हो सकता है वे किसी और पहलू से मामले को देख रहे हों, और यह भी हो सकता है कि उनका नज़रिया सही हो। (मंकूल/वर्णित)

सबसे हालिया

Naats