اللباب فِی شرح الکتاب ۳
कवर देखें

اللباب فِی شرح الکتاب ۳

इस पुस्तक को एक क्लिक के साथ देखें। ऑनलाइन पढ़ें या ऑफलाइन पढ़ने के लिए डाउनलोड करें।

चालाक अमीर और समझदार किसान की कहानी

चालाक अमीर और समझदार किसान की कहानी

एक शातिर और चालाक मालदार (अमीर) शख़्स किसी गाँव में एक किसान के पास पहुँचा और उसे पार्टनरशिप (साझेदारी) का ऑफ़र दिया, कि रक़म मेरी होगी और मेहनत तुम्हारी! लेकिन जब फ़सल तैयार हो जाएगी तो जो हिस्सा ज़मीन के अंदर होता है वह तुम्हारा जबकि ऊपर वाला सारा मेरा होगा (यह चालाकी उसने इसलिए की क्योंकि ज़मीन में जड़ें होती हैं जो इस बेवकूफ़ किसान के हिस्से में आएंगी और असल क़ीमत तो ऊपर वाले हिस्से की होती है वह मैं ले उड़ूँगा)। बहरहाल, किसान ने कुछ देर सोचा और ऑफ़र क़बूल कर लिया। जब फ़सल तैयार हो गई तो चालाक मालदार अपना हिस्सा लेने पहुँचा, तो यह देखकर अपना सर पकड़ लिया कि किसान ने प्याज़ की फ़सल बोई थी; चुनांचे समझौते के मुताबिक़ प्याज़ किसान के हिस्से में आई और ऊपर के बेक़ीमत (बेकार) पत्ते मालदार को मिले। चालाक मालदार ने सबक़ सीखकर बाज़ आने के बजाय एक और दांव खेलने का सोचा और किसान को एक मर्तबा फिर पार्टनरशिप का ऑफ़र दिया, लेकिन इस मर्तबा शर्त यह रखी कि फ़सल का जो हिस्सा ज़मीन के अंदर होगा वह मेरा और ऊपर वाला तुम्हारा! किसान ने यह शर्त क़बूल कर ली। जब फ़सल तैयार होने पर चालाक मालदार अपना हिस्सा लेने पहुँचा तो देखकर हक्का-बक्का रह गया कि किसान ने गन्ने उगाए थे, जिसकी बेकार जड़ें उसके हिस्से में आईं और क़ीमत वाले गन्ने किसान को मिले। किसान की समझदारी के हाथों दो मर्तबा अपनी चालाकी का नुक़सान उठाने के बाद भी मालदार ने हार नहीं मानी और सारा हिसाब चुकाने के लिए किसान को अगली फ़सल के लिए रक़म देते हुए कहा: "मैं दो मर्तबा नुक़सान में रहा हूँ, इसलिए इस मर्तबा फ़सल का निचला और ऊपर वाला हिस्सा मेरा होगा, दरमियान (बीच) में जो कुछ होगा वह तुम्हारा होगा।" अबकी बार फ़सल तैयार हुई तो चालाक मालदार ख़ुशी-ख़ुशी खेतों में पहुँचा कि इस मर्तबा फ़ायदा सिर्फ़ मेरा होगा, लेकिन खेतों में पहुँचकर उसके चेहरे का रंग बदल गया कि किसान ने इस मर्तबा मकई (भुट्टा) उगाई थी, जिसका निचला और सबसे ऊपर वाला हिस्सा बेक़ीमत होता है और असल क़ीमत दरमियान में मौजूद भुट्टे की होती है। यूँ किसान की समझदारी ने मालदार की चालाकी को शिकस्त (हार) दे दी। प्यारे भाइयो! अक़्ल अल्लाह पाक की दी हुई बहुत बड़ी नेमत है, अब यह इंसान पर मौक़ूफ़ (निर्भर) है कि वह अक़्ल का इस्तेमाल सकारात्मक (मुस्बत) करता है या नकारात्मक (मन्फ़ी)! समझदारी में करता है या चालाकी में! 🖋🌹💠 साभार: सबक़ आमोज़ कहानियाँ 💠🌹🖋

सबसे हालिया

Naats