مرقاۃ المفاتیح شرح مشکوٰۃ المصابیح جلد 1
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अमानत व दियानत की आला तरीन मिसाल

अमानत व दियानत की आला तरीन मिसाल

नाज़िम नदवतुल उलमा हज़रत मौलाना बिलाल अब्दुल हई साहब हसनी नदवी ज़ीद मजदुहू ने दारुल उलूम के साबिक़ मोहतमिम हज़रत उस्ताज़ डॉक्टर मौलाना सईदुर्रहमान साहब आज़मी नदवी रह. के हवाले से यह सराहत फ़रमाई कि सख़्त जिस्मानी ज़ोअफ़ के सबब हज़रत मोहतमिम साहब पिछले ढाई साल से दारुल उलूम आने से क़ासिर रहे, इस दौरान मुर्शिद-ए-मिल्लत हज़रत मौलाना मुहम्मद राबे साहब हसनी नदवी रह. की हस्ब-ए-वसीयत मोहतमिम साहब को माहाना मुशाहरा हस्ब-ए-साबिक़ फ़राहम होता रहा और आज हज़रत मोहतमिम साहब की वफ़ात के बाद उनके वुरसा ने वह रक़म ज़िम्मेदारान-ए-नदवा को यह कहकर सौंप दी कि हज़रत मोहतमिम साहब ने यह कहकर कि मैं ढाई साल से अपने फ़राइज़ अंजाम नहीं दे पा रहा, लिहाज़ा मैं इस रक़म का मुस्तहिक़ नहीं, और रक़म नदवे की तामीर व तरक़्क़ी पर ख़र्च की जाए, तक़रीबन चौदह लाख 140000 की यह रक़म ज़िम्मेदारान-ए-नदवा के सुपुर्द करने की वसीयत की है। ढूँढे है उसको ख़ल्क़-ए-ख़ुदा शम्अ लेके रात लाख ढूँढे कोई तो वह मिलता नहीं कहीं आज उनकी जुदाई का ज़ख़्म और गहरा बल्कि हरा होता दिखाई दिया, दिल घबराया और वहशत-ज़दा हो गया कि वफ़ाओं के ये चराग़ रफ़्ता-रफ़्ता गुल हो रहे हैं और हम उनके साये से महरूमी के शदीद एहसास के साथ जीने के लिए मजबूर हैं। أولئك آبائي فجئني بمثلهم आख़िर में हज़रत नाज़िम साहब की इस नवीद-ए-मसर्रत ने दिल की उजड़ी बस्ती को सँभाला कि अब इंशाअल्लाह इसी रक़म से ज़ेर-ए-तामीर रिवाक़-ए-राबे में हज़रत मोहतमिम साहब से मंसूब सईद हॉल तामीर किया जाएगा। आसमाँ तेरी लहद पर शबनम-अफ़्शानी करे सब्ज़ा-ए-नौरस्ता इस घर की निगहबानी करे सज्जाद हुसैन नदवी ---------Islamic Tube Pro--------- मनक़ूल - इंतिख़ाब: इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप-

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