पहली बार कोई मोटिवेशनल (प्रेरणादायक) लेख दिल को छू गया... आप भी इससे लाभ उठाएं। "मरियम ने 1 घंटे में 10 किलोमीटर की दूरी तय की। हारिस ने यही दूरी डेढ़ घंटे में तय की... दोनों में से कौन तेज़ और अधिक स्वस्थ हुआ? निश्चित रूप से हमारा जवाब होगा... 'मरियम'। अगर हम कहें कि मरियम ने यह दूरी एक तैयार ट्रैक पर तय की, जबकि हारिस ने रेतीले रास्ते पर चलकर तय की, तब? तब हमारा जवाब होगा... 'हारिस'। लेकिन हमें मालूम हुआ कि मरियम की उम्र 50 साल है, जबकि हारिस की उम्र 25 साल है, तब? हम फिर से कहेंगे... 'मरियम'। मगर हमें यह भी मालूम हुआ कि हारिस का वज़न 140 किलो है, जबकि मरियम का वज़न 65 किलो है, तब? तब हम कहेंगे... 'हारिस'। जैसे-जैसे हम मरियम और हारिस के बारे में अधिक जानते जाएंगे कि दोनों में से कौन बेहतर है, तो उनके बारे में हमारी राय और फैसला भी बदलता जाएगा। हम बहुत सतही (ऊपरी) चीजों को देखकर और बहुत जल्दबाज़ी में राय बना लेते हैं, जिससे हम खुद के साथ और दूसरों के साथ न्याय नहीं कर पाते हैं। इसी तरह, खुद की तुलना दूसरों से करते हुए हममें से बहुत से लोग निराश हो जाते हैं, जबकि हर किसी का माहौल अलग होता है... अवसर अलग होते हैं... ज़िंदगी अलग होती है... संसाधन अलग होते हैं... समस्याएं अलग होती हैं। यदि आप किसी काम में अपने हमउम्र लोगों से पीछे हैं, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वे सफल हैं और आप असफल हैं, वे श्रेष्ठ हैं और आप कमतर हैं... संभव है कि आपको मिले अवसरों और आपके सामने मौजूद परिस्थितियों को देखा जाए, तो आप उनसे कहीं बेहतर हों... ज़िंदगी की दौड़ में खुद को कभी कमतर न समझें; हीनभावना (احساس کمتری) हार की पहली सीढ़ी है..!!" (संकलित — इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप से चयनित)
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