इमाम ज़ैनुल आबिदीन की गुप्त सेवा – इख़्लास (निःस्वार्थता) की एक बेमिसाल मिसाल

इमाम ज़ैनुल आबिदीन की गुप्त सेवा – इख़्लास (निःस्वार्थता) की एक बेमिसाल मिसाल

इमाम ज़ैनुल आबिदीन (रहमतुल्लाही अलैहि) को अल्लाह तआला ने बहुत ख़ूबसूरत जिस्म अता किया था। जब उनकी वफ़ात (मृत्यु) हुई और ग़स्साल (शव नहलाने वाला) उन्हें नहलाने लगा, तो उसने देखा कि उनके कंधे के ऊपर एक काला निशान है। उसे समझ नहीं आया कि यह काला निशान क्यों है? अहले-ख़ाना (परिवार वालों) से पूछा गया तो उन्होंने भी कहा कि हमें पता नहीं है। जब कुछ दिन गुज़र गए तो वहाँ के कमज़ोरों (ज़ुअफ़ा) और विकलांगों के घरों से आवाज़ आई, "वह कहाँ गया जो हमें पानी पिलाया करता था?" फिर पता चला कि रात के अंधेरे में इमाम ज़ैनुल आबिदीन (रहमतुल्लाही अलैहि) पानी से भरी हुई मश्क अपने कंधे के ऊपर लेकर उनके घरों में पानी पहुँचाया करते थे, और इस राज़ को उन्होंने इस तरह छुपाए रखा कि ज़िंदगी भर किसी को पता भी न चलने दिया। (अल-बिदाया वल-निहाया: 1339, हिल्यतुल औलिया: 1363) यह है ईमानी ज़िंदगी कि इंसान दूसरे की ख़िदमत (सेवा) भी कर रहा है, हमदर्दी भी कर रहा है, मगर उससे सिर्फ़ 'शुक्रिया' की भी उम्मीद नहीं रखता। वह इंसानियत की ख़िदमत सिर्फ़ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की रज़ा (प्रसन्नता) के लिए कर रहा है।

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