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बिलकीस बानो मामले में दो दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत: 17 साल की कैद और विकलांगता बनी आधार

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकीस बानो से सामूहिक बलात्कार और उनके परिजनों की हत्या के मामले में दो दोषियों, बिपिनचंद कन्हैयालाल जोशी और प्रदीप रमनलाल मोढिया, को जमानत दे दी है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने 28 अक्टूबर को यह आदेश दिया, जो गुरुवार देर रात अपलोड हुआ। जमानत ट्रायल कोर्ट की तय शर्तों के अधीन है।

अदालत ने जमानत क्यों दी?

दोनों दोषी 17 साल से ज्यादा समय से जेल में हैं।

जोशी गंभीर रूप से विकलांग हैं।

अपील में तथ्यों और कानून से जुड़े ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर फैसला होना बाकी है।

एक अपीलकर्ता का नाम FIR में नहीं था और करीब तीन साल बाद उसे आरोपी बनाया गया था।

दोनों की दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपीलें अभी लंबित हैं, और दोषसिद्धि बरकरार है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजकुमार भास्कर ठाकरे ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अपराध में सामूहिक बलात्कार शामिल है और निचली अदालतों ने साक्ष्यों और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखा था।

मामले की पृष्ठभूमि

2002: दंगों के दौरान दाहोद जिले में पांच माह की गर्भवती बिलकीस बानो से सामूहिक बलात्कार हुआ और उनकी बच्ची समेत परिवार के सात सदस्य मारे गए।

2008: CBI की विशेष अदालत ने 11 आरोपियों को उम्रकैद सुनाई। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी।

अगस्त 2022: गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों को समय से पहले रिहा कर दिया, जिसकी व्यापक निंदा हुई।

2024: सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई रद्द की। उसने कहा कि छूट देने का अधिकार महाराष्ट्र सरकार के पास था और गुजरात को निर्देश दिलाने वाला आदेश तथ्य छिपाकर हासिल किया गया था।

आगे क्या?

दोनों दोषियों की अपीलें अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, और उन पर अंतिम फैसला आना बाकी है।